लेखनी प्रतियोगिता -22-Dec-2022
हर शाम सुबह होने का देती है पैगाम
उम्मीदे रखो दिल पर छोडो ना लगाम
आंधी आ जाये घरोंदे तुट जाये
आंधी थम ने दो जो हुआ रहने दो
फिर बनाओ अपना मक्काम ं
हर शाम सुबह होने का देती है पैगाम
ऩई किरणे लिये सूर्य की धूप
खिलते जायेंगे इस मे कई रुप
हर रुप का होगा नया नाम
हर शाम सुबह होने का देती है पैगाम
माथे पर पसीना आकर सुख जाये
मेहनत ऐसी कि आलस झुक जाये
हाथ चले तब तक जब मिले अंजाम
हर शाम सुबह का देती है पैगाम
-अभिलाषा देशपांडे
Punam verma
23-Dec-2022 09:38 AM
Very nice
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Mahendra Bhatt
23-Dec-2022 08:57 AM
वाह बहुत खूब
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हरिश्चन्द्र त्रिपाठी 'हरीश',
22-Dec-2022 08:55 PM
सुन्दर भाव सृजन।
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